श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.6.41 
बहुत प्रसाद सार्वभौम आनाइल ।
तबे महाप्रभु सुखे भोजन करिल ॥41॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य ने जगन्नाथ मंदिर से विभिन्न प्रकार के महाप्रसाद लाने की व्यवस्था की। तत्पश्चात श्री चैतन्य महाप्रभु ने बड़ी प्रसन्नता के साथ दोपहर का भोजन स्वीकार किया।
 
Sarvabhauma Bhattacharya arranged for various types of Mahaprasad to be brought from the Jagannath Temple.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd