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श्लोक 2.6.41  |
बहुत प्रसाद सार्वभौम आनाइल ।
तबे महाप्रभु सुखे भोजन करिल ॥41॥ |
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| अनुवाद |
| सार्वभौम भट्टाचार्य ने जगन्नाथ मंदिर से विभिन्न प्रकार के महाप्रसाद लाने की व्यवस्था की। तत्पश्चात श्री चैतन्य महाप्रभु ने बड़ी प्रसन्नता के साथ दोपहर का भोजन स्वीकार किया। |
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| Sarvabhauma Bhattacharya arranged for various types of Mahaprasad to be brought from the Jagannath Temple. |
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