श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.6.39 
सार्वभौम कहे , - शीघ्र करह म ध्याह्न ।
मुञि भिक्षा दिमु आजि महाप्रसादान्न ॥39॥
 
 
अनुवाद
भट्टाचार्य ने सभी को सूचित किया, "कृपया तुरंत मध्याह्न स्नान कर लें। आज मैं आपको महाप्रसाद, भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए गए भोजन का अवशेष, अर्पित करूँगा।"
 
Bhattacharya said to everyone, "Please take your afternoon bath immediately. Today I will give you Maha-Prasad, the highest offering of the food offered to Lord Jagannath."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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