श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 282
 
 
श्लोक  2.6.282 
सेइ सब कथा आगे करिब वर्णन ।
सार्वभौम करे यैछे प्रभुर सेवन ॥282॥
 
 
अनुवाद
बाद में मैं वर्णन करूँगा कि किस प्रकार सार्वभौम भट्टाचार्य सदैव भगवान की सेवा में लगे रहते थे।
 
I will describe later how Sarvabhauma Bhattacharya was always engaged in the service of Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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