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श्लोक 2.6.275  |
यद्यपि ‘मुक्ति’ शब्देर हय पञ्च वृत्ति ।
रूढ़ि - वृत्त्ये कहे तबु ‘सायुज्ये’ प्रतीति ॥275॥ |
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| अनुवाद |
| "मुक्ति" शब्द पाँच प्रकार की मुक्ति का संकेत देता है। लेकिन इसका सीधा अर्थ आमतौर पर ईश्वर के साथ एकाकार होने का विचार व्यक्त करता है। |
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| "The word 'Mukti' denotes five types of liberation. But generally, its main meaning is the realization of union." |
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