श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 245
 
 
श्लोक  2.6.245 
भट्टाचार्य कहे ताँरे करि’ नमस्कारे ।
तोमार सम्बन्धे प्रभु कृपा कैल मोरे ॥245॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ आचार्य को प्रणाम करते हुए भट्टाचार्य ने कहा, "चूँकि मैं आपका संबंधी हूँ और आप भक्त हैं, आपकी कृपा से भगवान ने मुझ पर दया की है।
 
Saluting Gopinath Acharya, Bhattacharya said, “I am your relative and you are a devotee, therefore, by your grace, Mahaprabhu has blessed me.”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd