श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 244
 
 
श्लोक  2.6.244 
गोपीनाथाचार्य बले , - ‘आमि पूर्वे ये कहिले ।
शुन, भट्टाचार्य, तोमार सेइ त’ हइल’ ॥244॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ आचार्य ने सार्वभौम भट्टाचार्य को याद दिलाया, “मेरे प्रिय भट्टाचार्य, मैंने जो कुछ आपसे कहा था, वह अब घटित हो गया है।”
 
Gopinath Acharya reminded Sarvabhauma Bhattacharya, “Dear Bhattacharya, whatever I told you earlier has now happened.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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