| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति » श्लोक 238 |
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| | | | श्लोक 2.6.238  | गोपीनाथाचार्य ताँर वैष्णवता देखियो ।
‘हरि’ ‘हरि’ बलि’ नाचे हाते तालि दिया ॥238॥ | | | | | | | अनुवाद | | यह देखकर कि सार्वभौम भट्टाचार्य वैष्णव धर्म में दृढ़तापूर्वक स्थित हो गए हैं, उनके बहनोई गोपीनाथ आचार्य नाचने लगे, ताली बजाने लगे और “हरि! हरि!” का जाप करने लगे। | | | | Seeing Sarvabhauma Bhattacharya firmly established in the Vaishnava sect, his brother-in-law Gopinath Acharya started dancing, clapping and chanting "Hari! Hari!" | | ✨ ai-generated | | |
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