श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  2.6.228 
दुइ - जने ध रि’ दुँहे करेन नर्तन ।
प्रभु - भृत्य दुँहा स्पर्शे, दोंहार फुले मन ॥228॥
 
 
अनुवाद
प्रभु और सेवक एक-दूसरे से गले मिले और नाचने लगे। एक-दूसरे को छूने मात्र से ही वे आनंदित हो गए।
 
The Lord and the servant embraced each other and began to dance. They were overcome with emotion by the mere touch of each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)