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श्लोक 2.6.217  |
पूजारी आनिया माला - प्रसादान्न दिला ।
प्रसादान्न - माला पा ञा प्रभु हर्ष हैला ॥217॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ के पुजारी ने उन्हें भगवान जगन्नाथ को अर्पित की गई मालाएँ और प्रसाद भेंट किया। इससे चैतन्य महाप्रभु बहुत प्रसन्न हुए। |
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| The priest brought him garlands of flowers and offerings offered to Lord Jagannath. This pleased the Lord immensely. |
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