श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  2.6.211 
प्रभु कहे, - ‘तुमि भक्त, तोमार सङ्ग हैते ।
जगन्नाथ इँहारे कृपा कैल भाल - मते’ ॥211॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "आप भक्त हैं। आपकी संगति के कारण भगवान जगन्नाथ ने उन पर कृपा की है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, “You are a devotee. It is because of your association that Lord Jagannatha has bestowed this grace upon him.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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