श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 210
 
 
श्लोक  2.6.210 
गोपीनाथाचार्य कहे महाप्रभुर प्रति ।
‘सेइ भट्टाचा र्येर प्रभु कैले एइ गति’ ॥210॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ आचार्य ने भगवान चैतन्य महाप्रभु से कहा, "महाराज, आपने यह सब सार्वभौम भट्टाचार्य पर लाद दिया है।"
 
Gopinath Acharya said to Chaitanya Mahaprabhu, “O Lord, you have made this the fate of Sarvabhauma Bhattacharya.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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