श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 203
 
 
श्लोक  2.6.203 
देखाइल ताँरे आगे चतुर्भुज - रूप ।
पाछे श्याम - वंशी - मुख स्वकीय स्वरूप ॥203॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने पहले उन्हें अपना चतुर्भुज रूप दिखाया और फिर कृष्ण के मूल रूप में उनके सामने प्रकट हुए, जिनका रंग श्याम वर्ण था और जिनके होठों पर बांसुरी थी।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu first showed his four-armed form and then he appeared before them in his original form of Krishna, dark in complexion and holding a flute on his lips.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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