श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  2.6.198 
सनकादि - शुकदेव ताहाते प्रमाण ।
एइ - मत नाना अर्थ करेन व्याख्यान ॥198॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने शुकदेव गोस्वामी और चार ऋषियों - सनक, सनत्कुमार, सनातन और सनन्दन - के संदर्भ में प्रमाण देकर इस श्लोक का अर्थ समझाया। इस प्रकार भगवान ने विभिन्न अर्थ और व्याख्याएँ दीं।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu explained this verse by presenting the evidence of Shukadev Goswami and four sages named Sanak, Sanatkumar, Sanatan and Sanandan. In this way Mahaprabhu presented various meanings and interpretations.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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