श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 196
 
 
श्लोक  2.6.196 
भगवान्, ताँर शक्ति, ताँर गुण - गण ।
अचिन्त्य प्रभाव तिनेर ना याय कथन ॥196॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "परम पुरुषोत्तम भगवान, उनकी विभिन्न शक्तियाँ और उनके दिव्य गुण, सभी अकल्पनीय पराक्रम रखते हैं। इनकी पूर्ण व्याख्या करना संभव नहीं है।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “The Supreme Personality of Godhead, His various energies and His transcendental qualities—all of these are endowed with inconceivable power. It is not possible to fully explain them.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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