श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 191
 
 
श्लोक  2.6.191 
‘भट्टाचार्य’, जानि - तुमि साक्षात्बृहस्पति ।
शास्त्र - व्याख्या करिते ऐछे कारो नाहि शक्ति ॥191॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "हे प्रिय भट्टाचार्य, आप बिल्कुल स्वर्ग के पुरोहित बृहस्पति के समान हैं। वास्तव में, इस संसार में किसी में भी शास्त्रों की इस प्रकार व्याख्या करने की शक्ति नहीं है।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "O Bhattacharya, you are like Brihaspati, the priest of heaven. Indeed, no one else in this world has the power to interpret the scriptures like this."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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