श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.6.189 
शुनि’ भट्टाचार्य श्लोक करिल व्याख्यान ।
तकर् - शास्त्र - मत उठाय विविध विधान ॥189॥
 
 
अनुवाद
तब सार्वभौम भट्टाचार्य ने आत्माराम श्लोक की व्याख्या शुरू की और तर्क के सिद्धांतों के अनुसार उन्होंने विभिन्न प्रस्ताव प्रस्तुत किये।
 
Then Sarvabhauma Bhattacharya started explaining the Atmaram verse and presented many propositions according to the principles of Tarka Shastra.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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