श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 182
 
 
श्लोक  2.6.182 
मायावादमसच्छास्त्रं प्रच्छन्नं बौद्धमुच्यते ।
मयैव विहितं देवि कलौ ब्राह्मण - मूर्तिना ॥182॥
 
 
अनुवाद
“[भगवान शिव ने भौतिक जगत की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा को बताया:] ‘कलियुग में मैं ब्राह्मण का रूप धारण करता हूँ और बौद्ध दर्शन के समान नास्तिक तरीके से झूठे शास्त्रों के माध्यम से वेदों की व्याख्या करता हूँ।’”
 
“[Lord Shiva told Durga, the presiding deity of the material world:] ‘In Kaliyuga, I will assume the form of a Brahmin and interpret the Vedas in an atheistic way through false scriptures, which will be like Buddhist philosophy.’
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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