श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  2.6.170 
‘परिणाम - वाद’ - व्यास - सूत्रेर सम्मत ।
अचिन्त्य - शक्ति ईश्वर जगद् रूपे परिणत ॥170॥
 
 
अनुवाद
“वेदान्त-सूत्र का उद्देश्य यह स्थापित करना है कि ब्रह्माण्डीय अभिव्यक्ति भगवान की अकल्पनीय शक्ति के रूपांतरण से अस्तित्व में आई है।
 
“The aim of the Vedanta Sutras is to establish that the vast universe has arisen from the transformation of the inconceivable power of the Supreme Personality of Godhead.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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