श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.6.15 
ताँहा शुने लोके कहे अन्योन्ये बात् ।
एक सन्न्यासी आसि’ देखि’ जगन्नाथ ॥15॥
 
 
अनुवाद
वहाँ भक्तों ने लोगों को एक भिक्षुक के बारे में बात करते सुना जो जगन्नाथ पुरी आया था और उसने जगन्नाथ के विग्रह के दर्शन किये थे।
 
There these devotees heard people talking about a monk who had come to Jagannath Puri and had seen the Jagannath Deity.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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