प्रभु कहे, - “सूत्रेर अर्थ बुझिये निर्मल ।
तोमार व्याख्या शुनि’ मन हय त’ विकल” ॥130॥
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अनुवाद
तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपना मन प्रकट करते हुए कहा, "मैं प्रत्येक सूत्र का अर्थ बहुत स्पष्ट रूप से समझ सकता हूँ, लेकिन आपकी व्याख्याओं ने मेरे मन को केवल विचलित कर दिया है।
Then Mahaprabhu expressed his thoughts saying, “I can understand the meaning of each sutra very well, but your explanation has disturbed my mind.”
तात्पर्य
वेदान्त-सूत्र के सूत्रों का तथ्यात्मक अर्थ सूर्य के प्रकाश की तरह स्पष्ट है। मायावादी दार्शनिक शंकराचार्य और उनके अनुयायियों द्वारा कल्पित व्याख्याओं के बादलों के साथ सूर्य के प्रकाश को ढंकने का प्रयास करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥