श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  2.6.126 
प्रभु कहे - “मूर्ख आमि, नाहि अध्ययन ।
तोमार आज्ञाते मात्र करिये श्रवण” ॥126॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "मैं मूर्ख हूँ, इसीलिए मैं वेदान्त-सूत्र का अध्ययन नहीं करता। मैं तो केवल आपसे सुनने का प्रयास कर रहा हूँ क्योंकि आपने मुझे आदेश दिया है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, “I am a fool, hence I do not study the Vedanta Sutras.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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