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श्लोक 2.6.120  |
वेदान्त पड़ाइते तबे आरम्भ करिला ।
स्नेह - भक्ति क रि’ किछु प्रभुरे कहिला ॥120॥ |
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| अनुवाद |
| फिर उन्होंने भगवान चैतन्य महाप्रभु को वेदान्त दर्शन की शिक्षा देनी आरम्भ की और स्नेह तथा भक्ति से प्रेरित होकर उन्होंने भगवान से इस प्रकार कहा। |
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| Then he started teaching Vedanta philosophy to Chaitanya Mahaprabhu and out of love and devotion he spoke to Mahaprabhu as follows. |
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