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श्लोक 2.5.92  |
आविर्भाव ह ञा आमि ताहाँ साक्षी दिब ।
तबे दुइ विप्रेर सत्य प्रतिज्ञा राखिब ॥92॥ |
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| अनुवाद |
| मैं वहाँ अवश्य प्रकट होऊँगा और उस समय वचन का साक्ष्य देकर तुम दोनों ब्राह्मणों के सम्मान की रक्षा करूँगा। |
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| “I will definitely appear there and at that time I will be a witness to the promise I have made and will protect the honour of both of you.” |
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