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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.5.9 
साक्षि - गोपालेर कथा शुनि, लोक - मुखे ।
सेइ कथा कहेन, प्रभु शुने महा - सुखे ॥9॥
 
 
अनुवाद
उस समय नित्यानंद प्रभु ने नगरवासियों से साक्षीगोपाल की कथा सुनी थी। अब उन्होंने उसे पुनः सुनाया और भगवान चैतन्य महाप्रभु ने बड़े आनंद से वह कथा सुनी।
 
At that time, Nityananda Prabhu had heard the story of Sakshi Gopal from the people of that town. Now he told the same story again, and Chaitanya Mahaprabhu listened to it with great joy.
तात्पर्य
साक्षीगोपाल मंदिर, खुर्दा रोड रेलवे स्टेशन और जगन्नाथ पुरी स्टेशन के बीच में स्थित है। देवता वर्तमान में कटक में नहीं है, लेकिन जब नित्यानंद प्रभु वहाँ यात्रा करते थे, तो देवता उपस्थित थे। कटक, महानदी नदी के किनारे स्थित उड़ीसा का एक शहर है। जब साक्षीगोपाल को दक्षिण भारत के विद्या नगर से लाया गया, तो वह कुछ समय कटक में रहे। उसके बाद, वह कुछ समय जगन्नाथ मंदिर में रहा। ऐसा लगता है कि जगन्नाथ मंदिर में जगन्नाथ और साक्षीगोपाल के बीच प्रेम-कलह नामक एक असहमति थी। इस प्रेम विवाद को सुलझाने के लिए, उड़ीसा के राजा ने जगन्नाथ पुरी से लगभग ग्यारह मील दूर एक गांव का निर्माण किया। गांव को सत्यवादी कहा जाता था और गोपाल को वहाँ रखा गया था। उसके बाद, एक नए मंदिर का निर्माण किया गया। अब एक साक्षीगोपाल स्टेशन है, और लोग गवाह गोपाल को देखने सत्यवादी जाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)