श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  2.5.80 
पुत्रेर मने, - ‘प्रतिमा ना आसिबे साक्षी दि ते’ ।
एइ बुद्ध्ये दुइ - जन हइला सम्मते ॥80॥
 
 
अनुवाद
नास्तिक पुत्र ने सोचा, "गोपाल का आना और गवाही देना संभव नहीं है।" ऐसा सोचकर, पिता और पुत्र सहमत हो गए।
 
The atheist son thought, “It is not possible for Gopal to come and testify.” Thinking this, both father and son agreed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)