श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.5.72 
तबे आमि कहिलाँ दृढ़ क रि’ मन ।
गोपालेर आगे कह ए - सत्य वचन ॥72॥
 
 
अनुवाद
“उस समय मैंने अपना मन एकाग्र किया और ब्राह्मण से गोपाल विग्रह के समक्ष वचन देने का अनुरोध किया।
 
“At that time I strengthened my mind and requested the Brahmin to give his word in front of Gopala-vigraha.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)