श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.5.56 
तबे सेइ विप्रेरे पुछिल सर्व - जन ।
‘कन्या केने ना देह, यदि दियाछ वच न’ ॥56॥
 
 
अनुवाद
वहाँ एकत्रित सभी लोगों ने वृद्ध ब्राह्मण से पूछा, "यदि आपने पहले ही उन्हें अपनी पुत्री दान में देने का वचन दिया है, तो आप अपना वचन क्यों नहीं निभा रहे हैं? आपने तो अपनी शपथ ली है।"
 
All the people gathered there asked the old Brahmin, "If you have already promised to give away your daughter in marriage, why are you not fulfilling your promise? You have already given your word."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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