श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.5.55 
‘इँह मोरे कन्या दिते कर्याछे अङ्गीकार ।
एबे ये ना देन, पुछ इँहार व्यवहा र’ ॥55॥
 
 
अनुवाद
"इस सज्जन ने अपनी बेटी मुझे सौंपने का वादा किया था, पर अब वह अपना वादा नहीं निभा रहे हैं। कृपया उनसे उनके व्यवहार के बारे में पूछिए।"
 
"This gentleman promised to give me his daughter, but now he is not keeping his word. Please ask him about his behavior."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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