श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.5.43 
पुत्र बले, - “प्रतिमा साक्षी, सेह दूर देशे ।
के तोमार साक्षी दिबे, चिन्ता कर किसे” ॥43॥
 
 
अनुवाद
उसके बेटे ने उत्तर दिया, "देवता साक्षी तो हो सकते हैं, परन्तु वे दूर देश में हैं। वे तुम्हारे विरुद्ध गवाही देने कैसे आ सकते हैं? तुम इस विषय में इतने चिंतित क्यों हो?"
 
His son replied, "Even if the Vigrahas are witnesses, they are in a faraway land. How can they come to testify against you? Why are you so worried about this?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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