ईश्वर के प्रति सचेत न होने से मानव समाज गिरकर पशु जीवन के निम्नतम स्तर पर पहुँच गया है। यह कृष्ण भावनामृत आन्दोलन आम जनता के बीच ईश्वर की चेतना को पुनर्जीवित करने के लिए बहुत आवश्यक है। यदि लोग वास्तव में ईश्वर के प्रति जागरूक हो जाते हैं, तो सारे झगड़े अदालत से बाहर निपटाए जा सकते हैं, जैसा कि उन दो ब्राह्मणों के मामले में हुआ था जिनकी असहमति का निपटारा गवाह गोपाल ने किया था।
