श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.5.30 
तोमाके कन्या दिब, सबाके क रि’ तिरस्कार ।
संशय ना कर तुमि, करह स्वीकार” ॥30॥
 
 
अनुवाद
"मेरे प्यारे बेटे, मैं अपनी बेटी तुम्हें दान में दे दूँगा, और बाकी सबकी परवाह नहीं करूँगा। इस बारे में मुझ पर शक मत करना; बस मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लो।"
 
"Dear child, I will give you my daughter, and I will not worry about others. Do not doubt me on this. Please accept my offer."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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