श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.5.25 
बड़ - विप्र कहे , - “तुमि ना कर संशय ।
तोमाके कन्या दिब आमि, करिल निश्च य” ॥25॥
 
 
अनुवाद
बड़े ब्राह्मण ने उत्तर दिया, "मेरे प्यारे बेटे, मुझ पर संदेह मत करो। मैं तुम्हें अपनी पुत्री दान में दूँगा। मैंने यह पहले ही तय कर लिया है।"
 
The old Brahmin said, "Son, don't doubt me. I will give you my daughter in marriage. I have already decided that."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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