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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 151
श्लोक
2.5.151
मोर अपराधे तोमार दण्ड हइल खण्ड ।
ये उचित हय, मोर कर तार दण्ड ॥151॥
अनुवाद
"निश्चय ही मेरे ही अपराध के कारण आपकी लाठी टूटी है। अब आप मुझे इस कारण जो उचित समझें, दण्ड दे सकते हैं।"
"Your punishment has certainly been broken because of my crime. Now punish me as you see fit."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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