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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 142-143
 
 
श्लोक  2.5.142-143 
कपोतेश्वर देखिते गेला भक्त - गण सङ्गे ।
एथा नित्यानन्द - प्रभु कैल दण्ड - भङ्गे ॥142॥
तिन खण्ड क रि’ दण्ड दिल भासा ञा ।
भक्त - सङ्गे आइला प्रभु महेश देखिञा ॥143॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान चैतन्य महाप्रभु कपोतेश्वर नामक भगवान शिव के मंदिर में गए, तो नित्यानंद प्रभु, जो अपना संन्यास दंड संभाले हुए थे, ने उस दंड को तीन भागों में तोड़कर भार्गिनी नदी में फेंक दिया। बाद में यह नदी दंड-भंग नदी के नाम से प्रसिद्ध हुई।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu visited the Shiva temple at Kapoteshwar, Nityananda Prabhu broke his renunciation staff into three pieces and threw them into the Bhargi River. This river later came to be known as the Danda Bhanga River.
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु के सन्यास-दण्ड (लाठी) का रहस्य श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर ने बताया है। श्री चैतन्य महाप्रभु ने एक मायावादी सन्यासी से सन्यास की दीक्षा ली थी। मायावादी संन्यासी, आमतौर पर एक लाठी या दण्ड रखते हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु की अनुपस्थिति का लाभ उठाते हुए, श्रील नित्यानंद प्रभु ने लाठी को तीन भागों में तोड़ दिया और उसे उस नदी में फेंक दिया, जिसे बाद में दण्ड-भंगा-नदी के रूप में जाना गया। सन्यास आदेश में चार भाग होते हैं - कुटीचक, बहूदक, हंस और परमहंस। केवल तभी जब संन्यासी कुटीचक और बहूदक प्लेटफॉर्म पर रहता है, तो वह लाठी रख सकता है। हालाँकि, जब कोई भक्ति पंथ का भ्रमण और प्रचार करने के बाद, हंस या परमहंस की स्थिति में ऊपर उठाया जाता है, तो उसे सन्यास दंड को छोड़ देना चाहिए।

श्री चैतन्य महाप्रभु श्री कृष्ण हैं, जो भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं। इसलिए, यह कहा गया है, श्री-कृष्ण-चैतन्य, राधा-कृष्ण नाहे अन्य: "दो व्यक्तित्व - श्रीमती राधारानी और श्री कृष्ण - श्री चैतन्य महाप्रभु के अवतार में संयुक्त हैं।" इसलिए, श्री चैतन्य महाप्रभु को एक असाधारण व्यक्ति मानते हुए, भगवान नित्यानंद प्रभु ने परमहंस अवस्था की प्रतीक्षा नहीं की। उन्होंने तर्क दिया कि भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व स्वतः ही परमहंस अवस्था में है; इसलिए उसे सन्यास-दण्ड ले जाने की आवश्यकता नहीं है। यही कारण है कि श्री नित्यानंद प्रभु ने दंड को तीन टुकड़ों में तोड़कर पानी में फेंक दिया।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)