श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  2.5.139 
एइ - मत महा - रङ्गे से रात्रि वञ्चिया ।
प्रभाते चलिला मङ्गल - आरति देखिञा ॥139॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक वह रात्रि मंदिर में बिताई। प्रातः मंगला आरती देखने के पश्चात् उन्होंने अपनी यात्रा प्रारंभ की।
 
Thus Sri Chaitanya Mahaprabhu spent that night happily in the temple. After witnessing the morning Mangala Aarti, he resumed his journey.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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