श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.5.122 
पुरुषोत्तम - देव सेइ बड़ भक्त आर्य ।
गोपाल - चरणे मागे , - ‘चल मोर राज्य’ ॥122॥
 
 
अनुवाद
राजा पुरुषोत्तम देव एक महान भक्त थे और आर्य सभ्यता में उन्नत थे। उन्होंने गोपाल के चरण कमलों में प्रार्थना की, "कृपया मेरे राज्य में पधारें।"
 
That king's name was Purushottam Dev. He was a great devotee and a pioneer in the Aryan civilization. He pleaded at Gopal's feet, "Please come to my kingdom."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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