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श्लोक 2.5.119  |
एइ मत विद्यानगरे साक्षि - गोपाल ।
सेवा अङ्गीकार करि’ आछेन चिर - काल ॥119॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार साक्षीगोपाल ने बहुत लम्बे समय तक विद्यानगर में रहकर सेवा स्वीकार की। |
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| Thus Sakshi Gopal accepted service for a long time by staying in Vidyanagar. |
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