श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  2.5.119 
एइ मत विद्यानगरे साक्षि - गोपाल ।
सेवा अङ्गीकार करि’ आछेन चिर - काल ॥119॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार साक्षीगोपाल ने बहुत लम्बे समय तक विद्यानगर में रहकर सेवा स्वीकार की।
 
Thus Sakshi Gopal accepted service for a long time by staying in Vidyanagar.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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