श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.5.111 
तबे सेइ बड़ - विप्र आनन्दित हञा ।
गोपालेर आगे पड़े दण्डवत् हञा ॥111॥
 
 
अनुवाद
तब वृद्ध ब्राह्मण अत्यन्त प्रसन्न होकर आगे आये और तुरन्त गोपाल के सामने लकड़ी की तरह गिर पड़े।
 
Then that old Brahmin also came in front of Gopal with great joy and immediately fell on the ground like a stick.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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