श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.5.104 
‘एबे मुञि ग्रामे आइनु, याइमु भवन ।
लोकेरे कहिब गिया साक्षीर आगमन ॥104॥
 
 
अनुवाद
“मैं अब अपने गाँव आ गया हूँ, और मैं अपने घर जाकर सभी लोगों को बताऊँगा कि गवाह आ गया है।”
 
“Now I have reached my village and will go to my house and tell everyone that Sakshi has come.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)