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श्लोक 2.4.9  |
अतएव ताँर पाये करि नमस्कार ।
ताँर पाय अपराध ना हउक् आमार ॥9॥ |
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| अनुवाद |
| मैं वृन्दावनदास ठाकुर के चरणकमलों में सादर प्रणाम करता हूँ। मुझे आशा है कि मैं अपने इस कृत्य से उनके चरणकमलों को ठेस नहीं पहुँचाऊँगा। |
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| Therefore, I offer my respectful obeisances unto the lotus feet of Vrindavana Dasa Thakura. I hope that by doing this I will not offend his feet. |
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