श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.4.81 
शय्या कराइल, नूतन खाट आनाञा ।
नव वस्त्र आनि तार उपरे पातिया ॥81॥
 
 
अनुवाद
भगवान के विश्राम की व्यवस्था करते हुए श्रीमाधवेन्द्र पुरी एक नया खाट लाए और उसके ऊपर एक नया चादर बिछाकर बिस्तर तैयार कर दिया।
 
To make arrangements for the Lord's rest, Srila Madhavendra Puri brought a new cot and a new sheet was spread over it and the bed was presented.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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