श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  2.4.79 
एक - दिनेर उद्योगे ऐछे महोत्सव कैल ।
गोपाल प्रभावे हय, अन्ये ना जानिल ॥79॥
 
 
अनुवाद
श्रीगोपालजी का अद्भुत उत्सव और स्थापना एक ही दिन में सम्पन्न हुई। निश्चय ही यह सब गोपालजी की शक्ति से ही सम्पन्न हुआ। इसे भक्त के अलावा कोई नहीं समझ सकता।
 
This amazing festival and the installation of Shri Gopalji were both arranged in a single day. Undoubtedly, all this was possible only through the power of Gopal. No one except the devotees can understand this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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