श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.4.78 
इहा अनुभव कैल माधव गोसाञि ।
ताँर ठाञि गोपालेर लुकान किछु नाइ ॥78॥
 
 
अनुवाद
गोपाल ने सब कुछ कैसे खा लिया, जबकि भोजन वैसा ही रहा, यह माधवेन्द्र पुरी गोस्वामी ने दिव्य दृष्टि से अनुभव किया; भगवान के भक्तों के लिए कुछ भी रहस्य नहीं रहता।
 
Madhavendra Puri learned through divine experience how Gopala consumed everything and yet the food remained intact. Nothing remains hidden from the Lord's devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)