श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  2.4.77 
यद्यपि गोपाल सब अन्न - व्यञ्जन खाइल ।
ताँर हस्त - स्पर्शे पुनः तेमनि हइल ॥77॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि श्रीगोपाल ने अर्पित सब कुछ खा लिया, फिर भी उनके दिव्य हस्त के स्पर्श से सब कुछ पहले जैसा ही रहा।
 
Although Shri Gopal had eaten all the offerings, yet with the touch of his divine hand everything remained as before.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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