श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  2.4.75 
हेन - मते अन्न - कूट करिल साजन ।
पुरी - गोसाञि गोपालेरे कैल समर्पण ॥75॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अन्नकूट समारोह सम्पन्न हुआ और माधवेन्द्र पुरी गोस्वामी ने स्वयं गोपाल को सब कुछ अर्पित किया।
 
Thus the Annakut festival was celebrated and Sri Madhavendra Puri Goswami himself offered everything to Gopal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)