श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.4.59 
तुलसी आदि, पुष्प, वस्त्र आइल अनेक ।
आपने माधव - पुरी कैल अभिषेक ॥59॥
 
 
अनुवाद
गाँव वाले बड़ी मात्रा में तुलसी के पत्ते, फूल और नाना प्रकार के वस्त्र लेकर आए। फिर श्रीमाधवेंद्र पुरी ने स्वयं अभिषेक [स्नान समारोह] आरंभ किया।
 
The villagers brought basil, flowers and various types of clothes in abundance. Then Shri Madhavendra Puri himself started the Abhishek (bathing ceremony).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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