श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.4.52 
आवरण दूर करि’ करिल विदिते ।
महा - भारी ठाकुर - केह नारे चालाइते ॥52॥
 
 
अनुवाद
जब उन्होंने भगवान के शरीर को शुद्ध कर लिया, तो उनमें से कुछ ने कहा, "भगवान का शरीर बहुत भारी है। कोई भी व्यक्ति उन्हें हिला नहीं सकता।"
 
When the body of the Deity was cleaned, some of them said, "This Deity is very heavy. One person alone cannot move it."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)