| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति » श्लोक 46 |
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| | | | श्लोक 2.4.46  | क्षणेक रोदन करि, मन कैल धीर ।
आज्ञा - पालन ला गि’ हइला सुस्थिर ॥46॥ | | | | | | | अनुवाद | | माधवेन्द्र पुरी कुछ देर तक रोते रहे, किन्तु फिर उन्होंने गोपाल की आज्ञा का पालन करने में अपना मन लगा लिया। इस प्रकार वे शान्त हो गए। | | | | Madhavendra Puri wept for some time, but then he calmed down after obeying Gopal's command. | | ✨ ai-generated | | |
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