| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति » श्लोक 40 |
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| | | | श्लोक 2.4.40  | तोमार प्रेम - वशे क रि’ सेवा अङ्गीकार ।
दर्शन दिया निस्तारिब सकल संसार ॥40॥ | | | | | | | अनुवाद | | "मेरे प्रति आपके असीम प्रेम के कारण मैंने आपकी सेवा स्वीकार की है। इस प्रकार मैं प्रकट होऊँगा, और मेरे दर्शन से सभी पतित आत्माओं का उद्धार होगा।" | | | | "I have accepted your service because of your love. In this way, I will appear, and by seeing me, all fallen people will be saved." | | ✨ ai-generated | | |
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