vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति
»
श्लोक 35
श्लोक
2.4.35
स्वप्ने देखे, सेइ बालक सम्मुखे आसिञा ।
एक कुञ्जे लञा गेल हातेते धरिञा ॥35॥
अनुवाद
माधवेंद्र पुरी ने स्वप्न में उसी बालक को देखा। बालक उनके सामने आया और उनका हाथ पकड़कर उन्हें जंगल में एक झाड़ी के पास ले गया।
Madhavendra Puri saw the same boy in his dream. The boy appeared before him, took his hand, and led him to a grove in the forest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×